Search This Blog
📘 Education Knowledge – Learn. Grow. Succeed. Education Knowledge is a learning platform designed to share valuable educational resources, insights, and ideas that inspire growth and understanding. Our goal is to make learning simple, engaging, and accessible to everyone — from students and teachers to lifelong learners. We provide a wide range of content including study materials, articles, career guidance, educational news, and learning tips to help you stay informed and motivated. With Edu
Featured
- Get link
- X
- Other Apps
गूगल आपकी वजह से ऐसे बन गया सर्च की दुनिया का 'बादशाह'
ऑनलाइन की दुनिया में Google हर जगह है। हर रोज़ Google पर करोड़ों प्रश्न पूछे जाते हैं। Google दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में से एक बन गई है।
Google ने उसूलों और उस खाते से काम करने का दावा शुरू किया था।
लेकिन इस साल अमेरिका की एक अदालत ने कहा कि बाजार में अपनी बड़ी खरीदारी का गूगल दोष फ़ायदा उठा रही है और इस कारण दूसरी कंपनी का टिकना अप्रभावी हो गया है।
जज जल्द ही फ़ैसला सुनाएंगे कि Google कंपनी को क्या सज़ा दी जाए?
गूगल का राज
गूगल इंटरनेट की दुनिया में यह घोटाला सामने आया है कि अब यह पहचानना भी मुश्किल है कि गूगल से पहले इंटरनेट पर सर्च कैसी होती थी।
पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता पत्रकार डेविड वाइस ने गूगल को फलते-फूलते देखा है और वो गुगल के इतिहास पर आधारित पुस्तक 'गूगल स्टोरी' के लेखक भी हैं।
वो कहते हैं कि स्टैनफ़र्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी के दो छात्र लैरी पेज और सर्गेइ ब्रिन इंटरनेट सर्च की क्वालिटी से ख़ुश नहीं थे इसलिए उन्होंने गूगल सर्च इंजन बनाया.
डेविड वाइज़ ने कहा, “90 के दशक के आख़िरी सालों के दौरान गूगल से पहले याहू सर्च और अल्टाविस्टा सर्च मौजूद थे. उन पर सर्च के रिज़ल्ट आने में काफ़ी समय लगता था और जो सर्च रिज़ल्ट आते थे उसमें विज्ञापन होते थे. विज्ञापन और रिज़्लट के बीच फ़र्क करना मुश्किल हो जाता था. इन दोनों ने गूगल सर्च इंजन बना कर इंटरनेट सर्च को तेज़ और विश्वसनीय बनाया. उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध वेब पन्नों को उनके महत्व के अनुसार रैंक किया या श्रेणी में ढाला जो पहले किसी ने नहीं किया था.”
उनका मक़सद कोई कंपनी बनाना या व्यापार करना नहीं था बल्कि केवल इंटरनेट पर सर्च को बेहतर बनाना था.
डेविड वाइज़ के अनुसार- वो इस सर्च इंजन को स्टैनफ़र्ड यूनिवर्सिटी को बेच कर अपनी पीएचडी पूरी करना चाहते थे, लेकिन उसे कोई ख़रीदना नहीं चाहता था. सभी ने कहा कि सर्च का कोई महत्व नहीं है. याहू और डिजीटल इक्वीपमेंट ने उनके सर्च इंजन को ख़रीदने से इंकार कर दिया. कोई उसे पांच लाख डॉलर में ख़रीदने को भी तैयार नहीं था. ना ही उसे और विकसित करने के लिए निवेश करने को राज़ी था.
मगर फिर सन माइक्रोसिस्टिम के संस्थापक एंडी बेक्टेलशाइन ने गूगल सर्च इंजन को आज़मा कर देखा और वो उससे काफ़ी प्रभावित हुए. उन्होंने लैरी पेज और सर्गेइ ब्रिन को एक लाख डॉलर का चेक थमा दिया.
डेविड वाइज़ कहते हैं कि व्यापार के लिए यह काफ़ी नही था इसलिए अधिक निवेश के लिए लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन सिलिकॉन वैली गए, जहां क्लाइनर पर्किंस ने एक करोड़ डॉलर और सुकाय कैपिटल कंपनी ने भी एक करोड़ डॉलर निवेश कर दिया.
लेकिन अब इस व्यापार को चलाने के लिए लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन को विज्ञापनों की ज़रूरत थी.
हालांकि कि वो शुरू से ही विज्ञापनों के ख़िलाफ़ थे.
डेविड वाइज़ ने बताया, ''जब लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन छात्र थे, तब वो विज्ञापनों को बहुत बुरा मानते थे और गूगल सर्च इंजन पर विज्ञापन नहीं देना चाहते थे. मगर विज्ञापनों के बिना व्यापार को आगे बढ़ाने की कोई अन्य योजना भी उनके पास नहीं थी.''
वो बोले, ''तब इसराइली उद्योगपति योसी बार्ड ने उन्हें कहा कि वो गूगल पेज पर एक नीली लाइन खींच दें जिसके एक तरफ़ सर्च के रिज़ल्ट होंगे और दूसरी ओर विज्ञापन होंगे. इससे लोग आसानी से रिज़ल्ट और विज्ञापनों में फ़र्क कर पाएंगे. उन्होंने इस तकनीक का इस्तेमाल किया और इसी के साथ गूगल सर्च इंजन से आगे बढ़ कर एक बड़े उद्योग में तब्दील होने लगा.''
अब गूगल पेज के दाहिने हिस्से में आने वाले विज्ञापनों से कंपनी अरबों डॉलर कमाती है. अब विज्ञापन देने वाली कंपनियां यह भी जान सकती हैं कि कौन उनका विज्ञापन देख रहा है और उनमें से कितने लोग उनके उत्पाद ख़रीद रहे हैं.
गूगल कंपनी विज्ञापनों के ज़रिए सालाना 200 अरब डॉलर कमाती है.
डेविड वाइज़ ने कहा, “जब गूगल कंपनी शुरू की गयी थी तो उसका सिद्धांत साफ़ था कि बुराई से दूर रहें. वो ईमानदारी और नैतिकता के साथ व्यापार करना चाहती थी. उसका उद्देश्य लोगों तक सभी जानकारी उपलब्ध कराना था. लेकिन जैसे जैसे कंपनी बढ़ती गयी उसके लिए अपने नैतिक सिद्धांत पर अड़े रहना मुश्किल होता चला गया.”
- Get link
- X
- Other Apps
Popular Posts
टाटा सिएरा के एंट्री-लेवल ट्रिम्स में 1.5-लीटर
- Get link
- X
- Other Apps
Maruti Suzuki Wagon R 2025 – 1.2L Petrol Engine
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment