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Bonds या Fixed Deposits में निवेश करना चाहते हैं? पहले जानिये रिस्क, रिटर्न और लिक्विडिटी के बारे में!
Bonds vs fixed deposits: अब जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप टैरिफ, रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी घटनाओं का असर दिख रहा है और भारत में भी महंगाई कम हो रही है, ऐसे माहौल में निवेशकों के सामने एक बड़ा सवाल है कि क्या पैसे बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखें या बांड में निवेश करें? इसपर निर्णय से पहले पांच जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए।
रिटर्न और कमाई की संभावनाएं
बैंक FD पर फिलहाल निवेशकों को लगभग 5.5% से 9% तक की ब्याज दरें मिल रही हैं। अंतिम ब्याज दर आपके प्रोफ़ाइल, क्रेडिट स्कोर और पिछले भुगतान इतिहास जैसी बातों पर भी निर्भर करती है।
इसके मुकाबले कुछ सरकारी बांड, जैसे RBI के फ्लोटिंग-रेट सेविंग्स बांड, लगभग 8.05% तक का रिटर्न दे सकते हैं। यह दर हर छह महीने में बदलती है। कॉरपोरेट बांड आमतौर पर 9.5% से 10% तक का रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन यह कंपनी और अवधि पर निर्भर करता है।
ध्यान रहे कि ये ब्याज दरें सिर्फ उदाहरण के लिए हैं। ताज़ी दरों के लिए संबंधित संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी लें। सार यह है कि बांड में अक्सर रिटर्न ज़्यादा मिलता है, लेकिन उनमें जोखिम और लॉक-इन अवधि भी ज़्यादा होती है। इसलिए निवेश करने से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सहायता ज़रूर लें।
सुरक्षा और जोखिम
FD को DICGC द्वारा प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक ₹5 लाख तक बीमा सुरक्षा मिलती है। इसलिए यह एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। बांड में क्रेडिट रिस्क रहता है, यानी बांड जारी करने वाली संस्था (कंपनी या सरकार) पैसे लौटाएगी या नहीं। इसकी जांच ICRA, CRISIL जैसी रेटिंग एजेंसियां करती हैं। हालांकि, सरकारी बांड को सॉवरेन गारंटी मिलती है, इसलिए वे बांडों में सबसे सुरक्षित माने जाते हैं।
निकासी और लिक्विडिटी
बैंक FD में समय से पहले पैसा निकाला जा सकता है, लेकिन कई बार पेनल्टी लग सकती है। बांड बाजार में खरीदे-बेचे जा सकते हैं, लेकिन उनके दाम उठते-गिरते रहते हैं और ब्याज दर तथा महंगाई के अनुमान पर निर्भर करते हैं। कुछ बांड, जैसे फ्लोटिंग-रेट बांड, में समय से पहले निकासी की अनुमति नहीं होती। इसलिए आपको उनकी अवधि पूरी होने तक इंतजार करना पड़ सकता है।
ब्याज दरों में बदलाव और महंगाई का असर
बांड की कीमतें ब्याज दर बढ़ने पर गिर सकती हैं, जिससे निवेशक को नुकसान हो सकता है। FD इस तरह की बाज़ार अस्थिरता से ज्यादातर सुरक्षित रहती है क्योंकि इसकी ब्याज दर तय होती है। फ्लोटिंग-रेट बांड में ब्याज आय महंगाई या ब्याज चक्र के अनुसार बदलती रहती है, जिससे आपको आंशिक सुरक्षा मिल सकती है।
महंगाई से FD और बांड दोनों के वास्तविक रिटर्न की कीमत घटती है। FD सुरक्षित होती है, लेकिन अक्सर महंगाई से तेज़ी से नहीं बढ़ पाती। वहीं, फिक्स्ड-रेट बांड भी बढ़ती ब्याज दरों में कीमत खो सकते हैं।
FD और बांड पर टैक्स
FD से मिलने वाला ब्याज आपकी आयकर स्लैब के अनुसार पूरी तरह टैक्सेबल होता है। तय सीमा से ज़्यादा ब्याज मिलने पर TDsभी कटता है। बांड पर मिलने वाला ब्याज भी इसी तरह टैक्सेबल है। लेकिन यदि आप बांड को बेचकर लंबी अवधि का कैपिटल गेन कमाते हैं, तो आपको इंडेक्सेशन का लाभ मिल सकता है।कुछ सरकारी बांड में मैच्योरिटी पर टैक्स-फ्री लाभ भी मिल सकता है, लेकिन यह बांड के प्रकार पर निर्भर करता है। इसलिए बांड में निवेश से पहले किसी वित्तीय योजनाकार से टैक्स से जुड़ी सही जानकारी लेना जरूरी है।
यदि आप सुरक्षा, सरलता और बीमा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, तो FD अनिश्चित बाज़ार में एक भरोसेमंद विकल्प है। लेकिन यदि आप उच्च रिटर्न चाहते हैं और थोड़े अधिक जोखिम के लिए तैयार हैं, तो बांड बेहतर कमाई दे सकते हैं। किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।
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