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New 2026 KIA SELTOS से इस तारीख को उठेगा पर्दा, कंपनी ने जारी किया टीजर, जानें क्या है चर्चा!

जारी टीजर से यह संकेत जरूर मिलता है कि 2026 Seltos का नया लुक आने वाला है। फ्रंट से लेकर रीयर तक में काफी सारे कॉस्मैटिक बदलाव भी किए जाने की चर्चा है। 2026 KIA SELTOS फेसलिफ़्ट आखिरकार सामने आ गई है। कंपनी ने इसका टीजर जारी किया है। इस कार की आगामी 10 दिसंबर को ग्लोबल प्रीमियर है। खबर के मुताबिक, इस बार किआ ने ग्राहकों की पसंद को समझकर बदलाव काफी कुछ बदलाव किए हैं। नया मॉडल पहले से ज्यादा शार्प, ज्यादा प्रीमियम और टेक्नोलॉजी से भरपूर है, वहीं फीचर्स जो आमतौर पर महंगी एसयूवी में देखने को मिलतें हैं, इसमें भी मिलेंगे। upea के मुताबिक, फ्रेश डिजाइन, अपडेटेड केबिन और एडवांस फीचर्स के साथ नई सेल्टोस युवाओं और फैमिली बायर्स को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसकी कीमत भी काफ़ी कॉम्पिटिटिव रहने वाली है। 2026 Kia Seltos Facelift का डिजाइन जारी टीजर से यह संकेत जरूर मिलता है कि 2026 Seltos का नया लुक आने वाला है। फ्रंट पर अब बड़ा ग्रिल, स्लिम LED हेडलाइट्स और मॉडर्न DRL सेटअप हो सकता है, जो इसे नेक्स्ट-जेन अपील देता है। साइड प्रोफ़ाइल पहले जैसी क्लीन है, लेकिन नए स्पोर्टी अलॉय व्हील्स इसे और मॉ...

ISRO कर रहा बड़ी तैयारी; अंतरिक्ष यान का निर्माण होगा तीन गुना, अब चंद्रयान-4 करेगा कमाल!

 इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे दी है, जिसे चंद्रयान-वापसी मिशन के रूप में डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भारत का अब तक का सबसे जटिल चंद्र अभियान होगा।


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि इसरो ने इस वित्त वर्ष में 7 और लॉन्चों की योजना बनाई है। भारत का पहला मानव अंतरिक्ष यान पूर्व निर्धारित कार्यक्रम 2027 में ही भेजा जाएगा। नारायणन ने कहा कि इसरो विज्ञान, तकनीकी एवं औद्योगिक क्षमता में तेजी से विस्तार के चरण की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसरो वित्त वर्ष के अंत से पहले सात और लॉन्चों का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इनमें एक वाणिज्यिक वाणिज्यिक उपग्रह और कई पीएसएलवी और जीएसएलवी मिशन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान पूरी तरह से भारतीय उद्योग की ओर से निर्मित पहले पीएसएलवी का लॉन्च माइल्स का पत्थर साबित होगा।

इसरो प्रमुख ने कहा कि सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे दी है, जिसे चंद्रयान-4 मिशन के रूप में डिजाइन किया गया है। यह भारत का अब तक का सबसे जटिल चंद्र अभियान होगा। उन्होंने कहा, 'हमने चंद्रयान-4 के लिए 2028 का लक्ष्य रखा है।' एक अन्य प्रमुख मिशन क्रूज़एक्स है जो जाक्सा (जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी) के साथ जाने वाला संयुक्त चंद्र ध्रुवीय प्रयोगशाला कार्यक्रम है। नारायणन ने कहा कि इसरो मिशन के कारण मिट्टी मांग के साथ मिलकर अगले तीन वर्षों में अपने वार्षिक अंतरिक्ष यान उत्पादन को तिगुना करने पर भी काम कर रहा है।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ का अध्ययन

चंद्रयान-4 चंद्रमा से वापस लौटने का प्रयास। यह एक ऐसी क्षमता है जिसका प्रदर्शन अभी केवल अमेरिका, रूस और चीन तक ही किया गया है। क्रूज़ेक्स का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ का अध्ययन करना है। नारायणन ने कहा कि इसरो ने एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पर काम शुरू कर दिया है जिसे 2035 तक पूरा करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा, '2028 तक पहली कक्षा में 5 आर्किटेक्चर स्थापित किए जाएंगे।' इस प्रयास से भारत अंतरिक्ष स्टेशन संचालित करने वाला तीसरा प्रमुख देश बनेगा। अमेरिका के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) अपने अंतिम चरण में है और चीन का तियांगोंग में ऑपरेशन पूरी तरह से शुरू हो गया है।

मानव अहित मिशनों का समय-सीमा परिवर्तन

भारत के पहले मानव-अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान को लेकर नारायणन ने स्पष्ट किया कि केवल मानव-अंतरिक्ष उड़ान मिशन की समय-सीमा बदली है। उन्होंने कहा, 'मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मानवरहित मिशन 2025 का लक्ष्य था। मानवयुक्त मिशन की योजना सदैव 2027 के लिए बनाई गई थी और इस तिथि में कोई बदलाव नहीं किया गया है।' भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के साथ पहली उड़ान से पूर्व तीन मानवरहित परीक्षण मिशन होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर ले जाने और 2040 तक उन्हें सुरक्षित वापस लाने की दिशा में काम करने का भी निर्देश दिया है। भारत की वैज्ञानिक मानव-अंतरिक्ष उड़ान योजना उसे दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों की श्रेणी में खड़ा करती है। अमेरिका आर्टेमिस के तहत चंद्र मानवयुक्त चंद्र अभियान की योजना बनाई जा रही है जबकि चीन ने अपने पहले मानवयुक्त चंद्र अभियान के लिए 2030 का लक्ष्य रखा है।

भारत की दुकान में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था

नारायणन ने कहा कि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग भारत के भंडार में वर्तमान में लगभग 2 प्रतिशत है। इसरो 2030 तक इसे 8 प्रतिशत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष उद्योग की वर्तमान कीमत लगभग 8.2 अरब अमेरिकी डॉलर है। 2033 तक 44 अरब अमेरिकी डॉलर तक की वृद्धि का अनुमान है। वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग वर्तमान में लगभग 630 अरब अमेरिकी डॉलर और 2035 से 1.8 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों से लेकर निजी भागीदारी में तेजी से वृद्धि हुई है। भारत के अंतरिक्ष प्रवचन तंत्र में अब 450 से अधिक उद्योग और 330 के नमूने सक्रिय हैं, जो कुछ साल पहले के केवल तीन अध्ययनों की तुलना में बड़ी वृद्धि है।


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